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एक minute

“मोहब्बत करने वाले कम ना होंगे,
तेरी महफ़िल में लेकिन हम ना होंगे,
ज़माने भर के ग़म या इक तेरा ग़म,
ये ग़म होगा तो कितने ग़म ना होंगे..”

रात और ग़ज़ल की एक अलग chemistry है। उस ख़ामोश से लम्हे में जब खिड़की पे अकेले बैठ कर आप अपनी favorite ग़ज़ल सुन रहे होते हैं… जब हफ्ते भर की tension एक minute में भूल जाते हैं… जब हलकी हलकी हवा आपके कानों को छूकर निकल जाती है.. जब उस एक minute के लिए सब कुछ Utopia जैसा feel होता है.. ऐसा लगता है जैसे दुनिया में गरीबी, terrorism, rape, भुखमरी, corruption.. कुछ भी नहीं है..

बस एक चाँद है जो बादलों के साथ छुपन-छिपाई खेल रहा है.. एक सड़क है, अकेली सी रात में जो street light में नहा रही है.. एक पेड़ है जिसके पत्तों की सरसराहट कुछ कहना छह रही है.. और आप हैं जो इस भागती-दौड़ती, घर और office के बीच सिमट के रह गयी ज़िन्दगी के पेचो ख़म से उकता कर बस उस एक minute को जी भर के जी लेना चाहते हैं..

एक advice है.. जब ही ऐसा एक minute आपको मिले, तो उसे और उसकी यादों को संभाल के रखियेगा.. बड़ी खुशनसीबी से मिलता है वो.. बता कर भी नहीं आता.. बस यूं ही रात के साये में ज़िन्दगी जीने के कुछ राज़ बता जाता है..

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